एक समय की बात है, एक छोटा सा बिल्ला जंगल में रहता था। वह बिल्ला बहुत ही खुशमिज़ाज़ था और हमेशा खेलने का मन करता था।
एक दिन, वह अपने दोस्त सियार से मिलने जाता है। सियार बिल्ले को एक नई खेल के बारे में बताता है। वह खेल यह है कि जितना तेज तुम दौड़ सको, उतना तेज दौड़ो।
बिल्ला और सियार एक साथ दौड़ने लगते हैं। बिल्ला जितना तेज दौड़ सकता था, वह वैसा ही करता था। लेकिन बिल्ला ने ध्यान नहीं दिया कि सियार उससे अधिक तेज दौड़ रहा था।
जब दौड़ समाप्त होता है, तो बिल्ला थक कर बैठ जाता है। सियार बिल्ले को मुस्कराते हुए देखता है और कहता है, "दोस्त, हमेशा अपनी शक्तियों को समझो और अपने अनुसार दौड़ो।"
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपनी स्वाभाविक क्षमताओं को समझना चाहिए और अपने अनुसार काम करना चाहिए।

