रात का समय था और आसमान में बादल छाए हुए थे। गांव के पास की पुरानी हवेली से किसी औरत के चीखने की आवाजें आ रही थीं। गांव वाले कहते थे कि इस हवेली में एक खूंखार चुड़ैल का वास है, जिसे कोई भी देख ले, उसका बच पाना नामुमकिन है।
बहुत समय पहले, इस हवेली में एक महिला रहती थी, जिसका नाम रुक्मिणी था। रुक्मिणी बहुत सुंदर थी, लेकिन उसका जीवन दुखों से भरा था। उसके पति ने उसे धोखा देकर किसी और से शादी कर ली थी। इस धोखे और अपमान से आहत होकर रुक्मिणी ने आत्महत्या कर ली। उसकी आत्मा को शांति नहीं मिली और वह चुड़ैल बन गई।
गांव में लोग कहते हैं कि रुक्मिणी की आत्मा अब इस हवेली में भटकती है और रात के समय जो भी इस हवेली के पास से गुजरता है, उसे वह अपने साथ ले जाती है। कई लोग रात को इस हवेली के पास से गायब हो चुके थे। इस कारण से गांव वालों ने इस हवेली से दूर रहना ही बेहतर समझा।
एक दिन, गांव में एक नौजवान लड़का, जिसका नाम राजू था, ने इस चुड़ैल की कहानी को मजाक समझा और उसने अपने दोस्तों से शर्त लगाई कि वह रात में हवेली में जाकर चुड़ैल को चुनौती देगा। उसके दोस्तों ने उसे रोका, लेकिन वह नहीं माना और रात को अकेला हवेली की तरफ निकल पड़ा।
जैसे ही वह हवेली के पास पहुंचा, उसे चारों ओर ठंडी हवाएं महसूस होने लगीं। अचानक हवेली के दरवाजे अपने आप खुल गए और एक डरावनी हंसी की आवाज सुनाई दी। राजू का दिल जोरों से धड़कने लगा, लेकिन उसने हिम्मत दिखाते हुए अंदर कदम रखा। अंदर घुप्प अंधेरा था, सिर्फ चिराग की हल्की रोशनी दिख रही थी।
जैसे ही वह हवेली के अंदर गया, दरवाजे जोर से बंद हो गए। वह घबरा गया, लेकिन फिर भी आगे बढ़ता रहा। अचानक उसे लगा कि कोई उसके पीछे है। |उसने मुड़कर देखा, तो उसे रुक्मिणी की सड़ी-गली शक्ल नजर आई, जिसकी आंखों से खून बह रहा था। उसकी लाल-लाल आंखें सीधे राजू की तरफ देख रही थीं।
राजू के होश उड़ गए और वह पीछे हटने लगा, लेकिन तभी चुड़ैल ने उसे अपनी ताकत से जकड़ लिया। उसकी चीख गांव तक पहुंची, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई नहीं आया। अगली सुबह, गांव वाले जब हवेली के पास पहुंचे, तो वहां राजू का कोई निशान नहीं था। सिर्फ हवेली के दरवाजे पर खून के निशान थे।
कहते हैं कि उस रात के बाद से कोई भी उस हवेली के पास जाने की हिम्मत नहीं करता। और रुक्मिणी की आत्मा आज भी वहां भटक रही है, इंतजार कर रही है कि कोई और उसकी हवेली में कदम रखे और वह उसे अपनी दुनिया में खींच सके।

