Part 1 : गलियारे की गूँज
. इलियस हवेली में डराने के लिए नहीं रहता था; वह तो बस उसकी दीवारों की दरारों में फंस गया था। वह कोई भयानक साया नहीं, बल्कि एक धुंधली पड़ती तस्वीर जैसा था। उसने दशकों तक दीवार के कागज़ों को धूप से झुलसी खाल की तरह उखड़ते देखा था। उसे गर्म सड़क पर बारिश की महक और अपनी चांदी की घड़ी का वजन याद था, लेकिन जिन लोगों से वह प्यार करता था, उनके चेहरे उसके मन में घिसकर चिकने पत्थरों जैसे बेजान हो चुके थे।
Part 2: जीवित अतिथि
. फिर क्लारा आई। वह अपनी किताबों और वायलिन के साथ उस घर में रहने लगी। दूसरों के विपरीत, जब इलियस उसके पास खड़ा होता, तो वह डर से कांपती नहीं थी। उसने एक धुन बजाई—तीखी, उदास और जानी-पहचानी। जैसे ही वायलिन के तारों पर गज घिसा, इलियस के पारदर्शी सीने में एक चिंगारी उठी।
Part 3. अंतिम सुर
. उस संगीत ने एक पुल का काम किया। अचानक, उसके मन के वो "पत्थर" टूट गए। उसे एक नाम याद आया—क्लारा की दादी का नाम। वह कोई गुमनाम धुंध नहीं था; वह एक पति, एक पिता और एक कवि था।
क्लारा ने संगीत रोका और सीधे उस कोने की ओर देखा जहाँ वह खड़ा था। "मुझे फर्श के नीचे आपकी घड़ी मिली," वह धीरे से फुसफुसायी। उसने चांदी की वह घड़ी मेज पर रख दी। अपनी पहचान वापस मिलते ही, घर की वो भारी जंजीरें टूट गईं। इलियस गायब नहीं हुआ; वह बस आखिरकार वहां पहुंच गया जहां उसे होना चाहिए था।



