जापान की एक सुनसान सड़क पर खून का सैलाब बह रहा था। एक रहस्यमयी सामुराई, जिसकी तलवार हर वार में गाजर-मूली की तरह सिर काट रही थी, ने दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। ट्रेंड लड़ाके भी उसके सामने बेबस थे। उसकी लाल रंग से सनी पोशाक और ठंडे चेहरे पर सिर्फ़ एक ठहराव था। कोई गोली उसे छू नहीं पा रही थी, कोई तलवार उसे खरोंच तक नहीं दे पा रही थी।केंजी, एक कुशल तलवारबाज और दल का लीडर, ने उसका सामना करने की हिम्मत की। लेकिन कुछ ही पलों में उसका सिर भी धड़ से अलग था। केंजी का साथी हरुतो, जान बचाकर पुलिस स्टेशन की ओर भागा। सांसें फूल रही थीं, दिल दहशत से धड़क रहा था। उसने पीछे मुड़कर देखा - वह सामुराई दूर अंधेरे में एक पेड़ के नीचे खड़ा उसे घूर रहा था।यह पहली बार नहीं था। दो महीने पहले, टोकू शहर में इस सामुराई का आतंक शुरू हुआ था। पहले लोग उसकी विचित्र वेशभूषा का मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन जब उसने एक झटके में एक आदमी का सिर काट दिया, तो दहशत फैल गई। हर रात वह किसी गली में प्रकट होता और जो सामने आता, उसका सिर धड़ से अलग कर देता। पुलिस की कई टुकड़ियां भेजी गईं, लेकिन कोई जिंदा नहीं लौटा। लोग उसे अब "ब्लड रेड समुराई" कहने लगे। कुछ का मानना था कि यह कोई सामुराई की आत्मा है, जो बदला लेने लौटी है।हरुतो पुलिस स्टेशन पहुंचा, जहां उसकी हालत देखकर लोग सदमे में थे। पुलिस ने पूरे जापान में खबर फैलाई कि ऐसे तलवारबाज चाहिए जो इस सामुराई का मुकाबला कर सकें। दस दिन बीत गए, लेकिन कोई नहीं आया। तभी एक दिन, दो युवा तलवारबाज और एक बुजुर्ग व्यक्ति स्टेशन पहुंचे। बुजुर्ग जापान के सबसे पुराने सामुराई वंश का वंशज था। उसने दावा किया कि इन युवाओं को उसने प्रशिक्षित किया है और वे सामुराई को हरा सकते हैं। बदले में उसने जापान का सर्वोच्च सम्मान और दोनों युवाओं के लिए अमर ख्याति मांगी।रात ढली। पूरा शहर सांस थामे इंतज़ार कर रहा था। चांद जब आसमान में चमका, वह सामुराई एक छत पर प्रकट हुआ। उसने बुजुर्ग की ओर दौड़ लगाई, लेकिन युवाओं ने उसे चुनौती दी। प्रथा थी कि सामुराई चुनौती को ठुकरा नहीं सकता। पुलिस ने मौका देखकर निशाना साधा, लेकिन गोलियां फिर बेकार रहीं। युवाओं ने पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन सामुराई की तलवार ने कुछ ही पलों में दोनों के सिर काट दिए। बुजुर्ग स्तब्ध रह गया। उसने फुसफुसाया, " एसी. तलवारबाजी तो सिर्फ़ तक मास्टर ही कर सकता था, जिसे मरे ज़माना बीत गया।"अगले ही पल, उसका सिर भी ज़मीन पर था।शहर में डर का साया और गहरा हो गया। लोग रात होते ही घरों में छिपने लगे। पुलिस को यकीन था कि यह सामुराई आसपास ही है, लेकिन उसे पकड़ना असंभव लग रहा था। तभी हरुतो को एक नाम सुझाया गया - डिटेक्टिव अमरसिंह, एक ऐसा शख्स जिसने कभी हार का मुंह नहीं देखा।क्या डिटेक्टिव अमरसिंह इस ब्लड रेड समुराई का रहस्य खोल पाएगा? क्या वह वाकई एक आत्मा है, या कुछ और? जानने के लिए पढ़ें अगला भाग!


