चार लोगों का एक परिवार है। खुशबू गृहणी है। उसका पति शिक्षक है जिसका नाम मुकुल है। मुकुल अपने स्कूल में पढ़ाकर घर आते हैं, घर आकर वह भोजन करते हैं, एक घंटा आराम करते हैं, फिर तीन से छह बजे तक किसी कोचिंग में अपना समय देते है। घर आकर वह पानी चाय पीता है। अपने छत पर जाकर हर रोज एक पौधा लगाता है, उसे पौधा से अधिक लगाव है। सुमन का बारहवीं कक्षा का पेपर चल रहा है। सुमन के चार बोर्ड के पेपर तो हो ही गएँ हैं। सुमन के माता पिता एक रात को भोजन कर रहे थे। वे समाचार में सुनते हैं कि "आज रात बारह बजे से पुरे भारत में लॉक डाउन होने जा रहा है और दसवीं तथा बारहवीं के बोर्ड के पेपर रदद कर दिए हैं। " मुकुल अपनी बेटी सुमन को बताते हैं कि बेटा तुम्हारा पेपर रद्द ही गया है अब तुम्हारा पेपर नहीं होगा। सुमन को इस बात पर विश्वाश नहीं हुआ। सुमन अपनी मम्मी से जाकर पूछती है कि क्या मम्मी मेरे पेपर रद्द हो गए है तो खुशबू बोलती है हाँ बेटा तुम्हारे पेपर रद्द हो गए है। सुमन को अपनी मम्मी के बात पर भी विश्वास नहीं हुआ फिर सुमन अपनी मम्मी का फ़ोन लेकर अपने व्हाट्सएप्प पर देखती है तो पता चलता है कि भारत में लॉक डाउन हो गया है और पेपर भी रद्द हो गया है। पुरे दो दिन तक राशन की भी दूकान बंद ही रखा गया था सारे काम बंद हो गए थे। लोग उसमे अपने नए सिरे से काम शुरू करने के लिए समय दिया गया था। मुकुल का कोचिंग भी बंद हो गया था। मुकुल और सुमन को अपने बच्चो के बीच समय व्यतीत करने का मौक़ा मिला। वे अपने बच्चे के साथ कैरम बोर्ड, लूडो, परकरम परकाई जैसे खेल खेलते थे। मुकुल और खुशबू मिलकर अपने दोनों बच्चे को पढ़ाते थे। बाजार से मुकुल सभी वस्तू लाते थे और लाने के बाद वे अच्छे से साबुन व शेम्पू लगाकर नहाते थे। पूरा परिवार मिलकर महाभारत, रामायण और विष्णु पुराण जैसे धारावाहिक देखते थे। माता पिता बच्चों को घर के भी काम सिखाते हैं। सभी एक दूसरे की मदद करते है। ये परिवार ख़ुशी से रह रहा होता है। कुछ दिनों के बाद घर में पैसे की कमी हो जाती है पर पैसे बैंक में थे। एक सप्ताह तक बैंक जाते रहे बड़ी मुश्किल से वे बैंक से अपने पैसे निकाल कर ला पाते हैं। दो महीने के बाद धीरे-धीरे काम खुलने लगता है। मुकुल के स्कूल से कॉल आता है क़ि स्कूल की क्लास अब ऑनलाइन होगी। तुम्हें बच्चों को घर बैठे ही ऑनलाइन पढ़ाना है। मुकुल इस बात पर राजी हो गया। आखिर कब तक घर में बैठ कर खता। मुकुल अपनी पत्नी खुशबू के फ़ोन से अपना पढाने का काम शुरू किया। फिर कुछ दिनों में मोहित की पढ़ाई शुरू होती है फ़ोन तो घर में एक ही था तो बाप बेटे दोनों की परेशानी बढ़ रही थी तो मुकुल मोहित को अपने नाम से फ़ोन लाकर दे देता है और कहता है कि ये फ़ोन मेरा है इस से तुम केवल पढाई ही करोगे। मोहित उस फ़ोन से वही काम करता है जिस के लिए उसे फ़ोन दिया गया था। अब कोरोना की वैक्सीन भी आ रही थी, धीरे-धीरे। पहले 60 वर्ष से ऊपर की फिर 45 वर्ष तक की फिर 18 वर्ष तक की आयी। मुकुल को सबसे पहले वैक्सीन लगी। फिर खुशबू और सुमन को वैक्सीन लगी। सुमन का बाहरवीं क्लास का रिजल्ट आने वाला था तो उस दिन सुमन को अंदर से डर था कि कहीं मेरे रिजल्ट गंदे नंबर ना आ जाए। इस कारण से खुशबू अपनी बेटी सुमन का रिजल्ट उसके भाई मोहित से निकलवाती है। सुमन का रिजल्ट मोहित अपनी मम्मी को दिखाता है। मम्मी रिजल्ट देख कर खुश हो जाती है। मम्मी रिजल्ट पापा को दिखाती है। पापा रिजल्ट देखकर खुश हो जाते हैं। पापा रिजल्ट सुमन को दिखाते हैं ,परन्तु सुमन अपने रिजल्ट को देखकर उदास होती है, इस कारण से सुमन के घर पर एक आयोजन होता है। उस आयोजन में मीट-मछली, सोया चाप जैसे भोजन का उपलब्ध करवाया जाता है। सुमन खुश हो जाये इस कारण से घर में केक आता है और केक सुमन से कटवाया जाता है। इस आयोजन में कम से कम दो सौ लोगो को बुलाया जाता है और पार्टी में सभी लोगें को आनंद आता है। पार्टी में आये लोग मुकुल के बच्चे को उपहार व् आशीर्वाद देते हैं। एक-दो दिन के बाद खुशबू अपने बेटे मोहित से कहती है कि सुमन के दाखिला दिल्ली यूनिवर्सिटी में करवाना है, उसका रजिस्ट्रेशन कर दे। मोहित बोलता है ठीक है मम्मी, मोहित सुमन का दाखिला के लिए रजिस्ट्रेशन कर देता है। पर शाम को सुमन पापा आते हैं और कहते हैं चलो मैं तुम्हें कंप्यूटर क्लास लगवा दू। ताकि तुम अपने पैरो पर खड़ी हो सको तुम इंजीनियर आगे चल कर बनो। सुमन बोली ठीक है पापा। अगले दिन से सुमन कंप्यूटर क्लास जाने लगी। कंप्यूटर में सुमन वर्ड, एक्सेल, पावर पॉइंट, लिंक बनाना आदि सीखी। कुछ सूत्र इस प्रकार है -
ctrl+B=BOLD
ctrl+C=COPY
ctrl+A=ALL SELECTED
ctrl+Z=UNDO
ctrl+P=PASTE
ctrl+Y=REDO
ctrl+U=UNDERLINE
ctrl+I=ITALIC इत्यादि।
इधर सुमन का भाई मोहित कई दिनों से प्रयत्न कर लेता था पर पता नहीं क्यों बार-बार दाखिला रुक जाती थी। सुमन भी अब परेशान रहने लगी उसे भी लगा कि "मेरा दाखिला डी.यू में क्यों नहीं हो रहा है। " वह डी ऊ के डीन के पास कॉल्स लगाती थी पर कोई भी कॉल्स उठाता नहीं था। खुश्बू को किसी ने बताया कि नार्थ कैंपस में जाकर गलती ठीक हो जायेगी। खुशबू के घर से नार्थ कैंपस काफी दूर था, अब वह खोज करने लगी कि वो उतनी दूर कैसे जायेगी। चार-पांच दिन बाद पता चला और खुशबू अपनी बेटी सुमन को लेकर नार्थ कैंपस गयी।वे दोनों बस से रास्ता देखते हुए जा रहे, लेकिन फिर भी दो बस स्टॉप गलती आगे उतर गए। अब वे कैसे दो बस स्टॉप पीछे जाए। सुमन दूकान वालो से पूछ-पूछ कर नार्थ कैंपस पहुंचे और वहां पर डीन से बातचीत किये तो उन्हें अपनी गलती का पता चल गया।



