बॉब पिछले तीन महीनों से बेरोज़गार था। ठीक से देखा जाए तो चार महीने, अगर उस आखिरी महीने को भी गिनें जब उसकी पुरानी कंपनी ने उसे सिर्फ इस लिए पैसे दिए थे ताकि वो सुबह जल्दी आना बंद कर दे। “ये एक टीम-बिल्डिंग एक्सरसाइज है,” उन्होंने कहा था। बॉब जानता था कि असल में टीम उसे छोड़कर पहले ही काफी बेहतर बिल्ड हो चुकी थी।
अब बॉब का रोज़ का रूटीन कुछ ऐसा था: सुबह 10 बजे उठना, 11 बजे तक खुद को समझाना कि वो आज बेहद प्रोडक्टिव रहेगा, और फिर दोपहर भर ऐसे नौकरी ढूंढ़नी जो किसी सुपरहीरो की योग्यता न मांगती हो। हर नौकरी की डिमांड ऐसी होती जैसे वो "क्वांटम एनर्जी एलाइंमेंट" जैसी किसी चीज़ में 10 साल का अनुभव चाहते हों, जिसका मतलब खुद बॉब को नहीं पता था।
आज बॉब ने ठान लिया था कि लंच से पहले कम से कम पाँच नौकरी के लिए आवेदन करेगा। उसके पास लैपटॉप था, एक कप कॉफी, और बैकग्राउंड में बजता "आज दुनिया फतह करो" प्लेलिस्ट। आज शुरुआत बढ़िया लग रही थी, जब तक उसने पहला जॉब पोस्टिंग नहीं खोला।
“एंट्री-लेवल” लिखा था। बढ़िया, बॉब एंट्री-लेवल का काम तो कर ही सकता था। लेकिन जैसे-जैसे उसने नीचे स्क्रॉल किया, उसकी उम्मीदें धुंधली होने लगीं: "कैंडिडेट के पास मास्टर्स की डिग्री होनी चाहिए...और कम से कम 5 साल का अनुभव।"
"ये एंट्री-लेवल है या NASA का डायरेक्टर बनने की तैयारी?" बॉब ने खुद से कहा।
दूसरे जॉब पर क्लिक किया, “फ्रीलांस कंटेंट राइटर चाहिए।” बॉब ने सोचा, "यह तो मेरे बस का है!" लेकिन फिर लिखा था, "कृपया तीन भाषाओं में लिखने की क्षमता हो, जिनमें से एक को आप खुद क्रिएट कर सकें।"
"हाँ, बिल्कुल! मैं एक नई भाषा गढ़ ही डालूँगा," बॉब ने sarcastically बड़बड़ाया।
तीसरे जॉब की तरफ बढ़ते हुए बॉब ने महसूस किया कि वो एक अजीब सी दुनिया में फंस गया है, जहाँ हर नौकरी असंभव कौशल और योग्यता चाहती है। उसका आत्मविश्वास अब कॉफी के उस आखिरी घूंट की तरह नीचे गिर चुका था।
तभी उसकी माँ का फोन आया, "बॉब, कुछ काम-धंधे का सोचा?"
"हाँ माँ, सोच रहा हूँ," बॉब ने जवाब दिया, "बस ये कंपनियाँ चाहती हैं कि मैं टॉप सीक्रेट मिशन पर जाऊं, मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाऊं, और फिर आकर उनके लिए कॉफ़ी बनाऊं।"
माँ हंसने लगी, "चलो, अब कुछ काम कर लो। बेरोजगार रहने से अच्छा है कि तुम घर के बर्तन ही साफ कर लो। कम से कम स्किल तो बढ़ेगी।"
और इस तरह बॉब ने अपने दिन की शुरुआत फिर से की—बर्तनों की चमक लाने में। आखिरकार, ये भी तो एक स्किल ही है!


