एक दिन, डब्बू स्कूल से घर आया और उसके हाथ में एक नोट था। नोट उसकी टीचर सीमा ने लिखा था और उसमें लिखा था कि डब्बू का हिंदी और गणित का होमवर्क पूरा नहीं हुआ है। डब्बू का चेहरा डर और चिंता से भरा था। उसने नोट दादी को दिखाया और कहा, "दादी, मुझे होमवर्क से डर लग रहा है। मैं हमेशा इसे टाल देता हूँ और अब टीचर ने हमारे माता-पिता को स्कूल बुलाया है।"
दादी ने डब्बू को ध्यान से देखा और महसूस किया कि उसे होमवर्क को लेकर असल में डर लग रहा है। उन्होंने कहा, "डब्बू, मैं समझ सकती हूँ कि तुम्हें डर लग रहा है, लेकिन डर को दूर करने का एक तरीका है। हम मिलकर इस समस्या को हल करेंगे और तुम्हें समझाएंगे कि होमवर्क का महत्व क्या है।
दादी और डब्बू स्कूल पहुंचे। टीचर सीमा ने उन्हें अपने कमरे में बुलाया। टीचर सीमा ने गंभीरता से कहा, "डब्बू को अपने हिंदी और गणित के होमवर्क में समस्या हो रही है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वह समय पर अपना काम पूरा करे।"
डब्बू का दिल धड़क रहा था। उसने सोचा, "अब मेरी दादी और टीचर सीमा दोनों ही मेरे साथ हैं। मुझे अपनी गलती स्वीकार करनी होगी।"
घर लौटकर, दादी ने डब्बू से कहा, "डब्बू, मैं समझती हूँ कि तुम्हें होमवर्क से डर लगता है, लेकिन डर को दूर करने के लिए हमें एक योजना बनानी होगी। हम इसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटेंगे ताकि तुम इसे आसानी से पूरा कर सको।"
दादी ने एक चार्ट तैयार किया जिसमें हर दिन के लिए अलग-अलग होमवर्क के हिस्से लिखे थे। साथ ही, उन्होंने डब्बू को प्रेरित करने के लिए एक विशेष चाँद का स्टिकर भी दिया जो उसे हर दिन अच्छे काम के लिए मिलेगा।
अगले दिन, डब्बू स्कूल में गया और उसने पलक और मोटू से अपने डर के बारे में बात की। पलक ने कहा, "डब्बू, हमें भी कभी-कभी ऐसा लगता है, लेकिन जब हम अपनी पढ़ाई को आसान हिस्सों में बाँट लेते हैं, तो यह इतना कठिन नहीं लगता। हम तुम्हारी मदद करेंगे।"
मोटू ने उत्साहित होकर कहा, "हाँ, हम साथ में होमवर्क करेंगे और एक-दूसरे की मदद करेंगे। इससे हम सबकी पढ़ाई भी अच्छी होगी और हम मस्ती भी कर सकेंगे।"
डब्बू ने अपनी दादी की योजना का पालन करना शुरू किया। पलक और मोटू भी उसकी मदद करने लगे। उन्होंने हर दिन कुछ समय मिलकर हिंदी और गणित के काम किए। डब्बू ने देखा कि जब वह काम को छोटे हिस्सों में करता है, तो यह बहुत आसान लगता है और उसका डर धीरे-धीरे कम होने लगा।
एक दिन, जब डब्बू ने अपना पूरा होमवर्क टीचर सीमा को दिखाया, तो टीचर सीमा ने उसे शाबाशी दी और कहा, "डब्बू, मुझे तुम्हारी मेहनत देखकर बहुत खुशी हुई। तुमने समय पर होमवर्क पूरा किया और इसका अच्छा परिणाम भी मिला।"
डब्बू की मेहनत रंग लाई। उसकी टीचर सीमा ने उसकी तारीफ की और पूरे स्कूल में उसकी सफलता की चर्चा होने लगी। पलक और मोटू ने डब्बू के साथ मिलकर जश्न मनाया। डब्बू ने भी अपने दोस्तों का धन्यवाद किया और कहा, "धन्यवाद, पलक और मोटू। आपकी मदद और दादी की योजना ने मुझे होमवर्क के डर को जीतने में मदद की।"
निष्कर्ष
डब्बू ने सीखा कि होमवर्क का डर केवल एक चुनौती है, जिसे सही योजना और दोस्तों के समर्थन से पार किया जा सकता है। दादी की मदद और पलक-मोटू के समर्थन से, डब्बू ने समझा कि मेहनत और नियमितता से ही सफलता मिलती है। अब डब्बू होमवर्क को एक जिम्मेदारी के रूप में देखता है और उसे समय पर पूरा करने में विश्वास रखता है


