राजस्थान के एक छोटे से गांव में, एक प्राचीन हवेली खड़ी थी, जिसका नाम था "शिवगढ़ी हवेली"। गांववाले उस हवेली के बारे में कहते थे कि वहां रात में एक काला साया घूमता है। किसी ने उस साए को देखा नहीं था, लेकिन उसके बारे में बहुत सी कहानियाँ प्रचलित थीं।
रवि, जो कि एक युवा फोटोग्राफर था, एक बार उस गांव में घूमने आया। जब उसने हवेली के बारे में सुना, तो उसकी जिज्ञासा बढ़ गई। वह अंधविश्वासों पर यकीन नहीं करता था, इसलिए उसने तय किया कि वह उस हवेली में जाकर फोटोग्राफी करेगा और सच्चाई का पता लगाएगा।
रवि रात के समय अपने कैमरे के साथ हवेली पहुंचा। हवेली की खंडहरों में कदम रखते ही उसे अजीब सी ठंड महसूस हुई, जैसे किसी ने उसके चारों ओर ठंडा पानी छिड़क दिया हो। हवेली के अंदर घुसते ही उसे एक पुरानी दराज मिली, जिसे खोलते ही उसमें से एक पुरानी डायरी मिली। उस डायरी में लिखा था कि यह हवेली कभी एक बड़े ज़मींदार की थी, जिनकी बेटी शिवानी थी। शिवानी की मौत रहस्यमयी हालातों में हुई थी, और उसके बाद से हवेली में एक काला साया मंडराने लगा था।
रवि ने डायरी को पढ़ना जारी रखा, तभी उसने महसूस किया कि कोई उसके पीछे खड़ा है। उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा, और उसकी आंखों के सामने एक काले साए की धुंधली आकृति उभर आई। वह साया धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा, और रवि के चारों ओर एक अजीब सी ठंड फैल गई।
रवि के हाथ-पैर कांपने लगे, लेकिन वह डर के बावजूद अपनी जगह से हिला नहीं। तभी वह साया उसकी आंखों के सामने गायब हो गया, और हवेली में एक तेज़ हवा चलने लगी। रवि ने तुरंत वहां से भागने का सोचा, लेकिन वह हवेली का रास्ता भूल गया। हर दरवाजा, हर खिड़की बंद हो चुकी थी।
वह दौड़ता रहा, चीखता रहा, लेकिन कोई उसे सुनने वाला नहीं था। अचानक उसे एक आवाज़ सुनाई दी, "तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए था।" उसने उस दिशा में देखा तो शिवानी का भूत उसकी ओर बढ़ रहा था।
शिवानी का चेहरा विकृत और दर्द से भरा हुआ था। वह बोली, "मैं इस हवेली में फंसी हुई हूं। मेरे साथ हुए अन्याय का बदला लेने वाला कोई नहीं। अब तुम भी यहीं फंस जाओगे।"
रवि को अचानक एहसास हुआ कि उसने गलती की है। वह दया की भीख मांगने लगा, और तभी उसे लगा जैसे उसकी आत्मा धीरे-धीरे उसके शरीर से निकल रही है। उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया, और वह बेहोश हो गया।
अगली सुबह, गांववाले रवि को हवेली के बाहर बेहोश अवस्था में पाए। जब उसने होश संभाला, तो वह कुछ बोल नहीं पाया। उसकी आंखों में वह खौफनाक रात अभी भी ताज़ा थी। गांववालों ने उसे समझाया कि हवेली में जो भी गया, वह वापस सामान्य जीवन में नहीं लौट पाया।
रवि ने वह गांव तुरंत छोड़ दिया, लेकिन उसके बाद वह कभी फोटोग्राफी नहीं कर पाया। कहते हैं कि अब वह गांव के आसपास के जंगलों में घूमता है, हवेली की कहानियाँ सुनाता है, और उसके पास जाने से मना करता है। लेकिन कुछ लोग आज भी कहते हैं कि उन्होंने रवि को रात में उस हवेली के पास देखा है, जैसे वह काले साए का एक हिस्सा बन गया हो।

