"प्रिया उठ जाओ बेटा सुबह के 8 बज गए वह तुम्हें कॉलेज जाना है की नहीं" आरती की थाल लीजिए प्रिया की मां जानकी के कमरे का दरवाजा खोलो कर अंदर आती हुई प्रिया को जगा रही थी
जैसे ही उनकी नज़र सोती हुई प्रिया पर गई वो प्रिया के चेहरे को देखते हुए वही खड़ी हुई अपने ख्यालो में ही गुम हो गई "कब ये इतनी बड़ी हो गई कुछ पता ही नहीं चला, अब कुछ ही सालों में ये शादी करके इस घर से चली जाएगी फिर महिनो तक मुझे इसका चेहरा भी नहीं देख पाउगी पता नहीं इसके जाने के बाद मैं कैसे रहूंगी इसके बिना अपनी सोच के गम जानकी इस बात से अंजान थी कि प्रिया उठ कर अपनी मां के बदलते हुए भाव को देख रही है प्रिया अपनी मां को आवाज लगाती है,
"मम्मी, मम्मी आपने मुझे इतनी जल्दी क्यो उठा दिया, मैं कितना अच्छा सपना देख रही थी जाइये मैं आपसे बात नहीं करती आपने मेरा सपना पूरा नहीं होने दिया"
जानकी प्रिया की बात पर मुस्कुरा कर बोली, " नौटंकी कम कर और अपने असली सपनों के बारे में सोच और उनको पूरा करने के लिए मेहनत करो और अब जल्दी सेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे फ्रेश होकर आ जा नास्ता कर और कॉलेज जा खूब मन लगा पढाई कर इतना बोल कर जानकी चली गई और किचन से बाहर टेबल पर ला कर रुखने लगि प्रिया भी अब बेड से उठ कर आलमारी से कपडे लेकर रेडी होने चली गई
प्रिया जल्दी से तैयार होकर आला ऐ उसकी नज़र टेबल पर गई जहां उसके घर के सभी लोग नाश्ता करने के लिए टेबल पर आ कर बैठे थे प्रिया भी टेबल आ कर सबको गुड मॉर्निंग विश कर नाश्ता करने लगी और नाश्ता खत्म कर फटाफट अपने कॉलेज के लिए निकल गई
प्रिया के घर में उसकी माँ जानकी रायकवार उसके पापा सुदेश रायकवार उसका छोटा भाई यश रायकवार और उसकी दादी निर्मला रायकवार और प्रिया बस 5 लोग रहते थे प्रिया एक मध्यमवर्गीय परिवार से है, उसके पापा चौहान ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में मैनेजर हैं उसकी मम्मी हाउसवाइफ है और यश उसका छोटा भाई अभी 9वीं क्लास में था चौहान ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज जयेश चौहान की है जयेश और सुदेश दोनों बचपन के दोस्त सुदेश का पहला बिजनेस हुआ करता था एक दिन उनके ऑफिस में आग लग गई और हमारे आग में सब कुछ जल कर खत्म हो गया और सुदेश जी को चौहान ग्रुप में नौकरी करनी पड़ी ताकि वो अपना सकें और अपने परिवार का भरण पोषण कर सके
जयेश की फैमिली में 4 लोग थे उनकी पत्नी शारदा चौहान उनकी बेटी सुधि चौहान और एक उनका बेटा अथर्व चौहान ! अथर्व अभी पुणे के फॉरग्यूसन कॉलेज से पढ़ाई कर रहा था कि अचानक से जयेश जी ने अपने शहर जयपुर वापस बुला लिया अथर्व आज जयपुर आने वाला है ये जन कर शारदा और सुधि दोनों ही बहुत खुश थे और अथर्व के आने की तैयारी कर रहे थे सुधि भी आज ये जन कर की उसका भाई आ रहा है खुशी से अपने कॉलेज नहीं गई सुधि प्रथम वर्ष में थी अथर्व फाइनल ईयर में था एक साल बाद अथर्व एम.बी.ए करके जयपुर अपने पापा का बिजनेस संभालने आने ही वाला था कि अचानक जयेश ने उसे बुला लिया जयेश जी ने अपने कार ड्राइवर के साथ अथर्व को लेन पूछा दी थी
प्रिया अपने कॉलेज के कैंटीन में दोस्तों के साथ बैठ कर बात कर रही थी प्रिया चुकी मिडिल क्लास फैमिली से थी तो उसके शौक हाई फाइट भी नहीं थे या ना उसके कपडे इतने महंगे हुए थे बाल्की अपने पापा की सिखाई हुई बात हर किसी की आत्मनिर्भर होना चाहिए इस वजह से प्रिया अपने खर्च के लिए पार्ट टाइम जॉब भी करती थी प्रिया द हिल्टन कैफे पर बिलिंग का काम करती थी जिसे उसकी जरूरत थी पूरी हो जाती थी और थोड़ी बहुत सेविंग भी प्रिया आज भी अपने कैफे जेन के लिए कॉलेज से निकल ही रही थी कि कॉलेज की एक लड़की उससे टकरा गई प्रिया से टकराने की वजह से उसके हाथ से उसका सारा सामान नीचे गिर गया जिसे देख वो लड़की आशी उस पर चिल्ला कर बोली, " यू मिडिल क्लास अंधी हो क्या दिखाई नहीं देता तुम्हें, मेरा सारा खाना बर्बाद कर दिया तुम्हें पता है वह कितना महंगा खाना था वो फिर वो प्रिया को तंज कसते हुए बोली, " तुम्हें क्या ही पता होगा कि ये खाना कितने का है मुझे तो लगता है तुमने तो देखा भी नहीं होगा ऐसा खाना आज तक इतने में प्रिया के दोस्त बिच मैं आकर प्रिया तुम क्या तब से इसकी बात सुन रही हूं जब तुमने कुछ किया ही नहीं तो जी हा, गलती तो आशी की ही थी वही प्रिया से टकराई थी प्रिया तो ध्यान से सामने देख कर हाय चल रही थी पर प्रिया तो हमारी प्रिया उसने कहा हाय किसी को उल्टा जवाब देना आता है इसलिए प्रिया के दोस्त उसकी हमेशा मदद करते हैं और वो उसको डेट भी कर ले ताकि प्रिया अपनी लड़ाई खुद से लड़ सके
इधर अथर्व अपने घर आ चूका था उसकी मां और बहन दोनो ही उसे देख बहुत खुश थे शारदा जी अथर्व बेटा केसा मुर्झा गया है मेरा बच्चा कुछ खाने को नहीं मिलता क्या वाहा मेरे बच्चे तुझे आजा आज मैं तुझे अपने हाथों से खाना खिलाउंगी वही सुधि भाई आप मेरे लिए क्या लाये हो मुझे पता है आप सिर्फ मेरे लिए कुछ अच्छा सा गिफ्ट लाये होगे प्लीज भाई जल्दी बताओ ना मुझसे अब और इंतजार नहीं हो रहा भाई अरे भाई, दोनों माँ बेटी ने मेरे बेटे को आते ही परेशान करना शुरू कर दिया कहते हुए जयेश जी पापा भाई कितने दिनों बाद आये उन्होंने मुझसे उनकी बात ही तो कर रखी थी बोलते हुए सुधि ने मासूम सा चेहरा बना दिया
अथर्व सोफे पर बैठा सुधी की नौटंकी देख जल्दबाजी में बोला रहने दो पापा इसकी नौटंकी इसे बंद नहीं होगी ये बोलते हुए अथर्व ने उसे एक कैरी बैग दिया जिस में सुधि के लिए एक ड्रेस या बहुत सारी चॉकलेट थी


